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माँ क्या तू शुन्य है ?

माँ तेरे भाव का भाव अनंत है। (भाव =भावना , भाव = मूल्य ) तूने मुझे चुना , वो भी तब ,जबकि मैं शून्य था। मुझे गढ़ा ,किए बड़ा ,हर दर्द मेरे लिए सहा। इस शून्य को तूने अनंत से मिला दिया। शून्य से अनंत के सफर को कराने वाली माँ। और खुद को कभी शून्य से ऊपर ही नहीं माना।   शायद ही धरती का कोई लाल होगा ,जिसे ये मालूम नहीं की तू अनंत है। इसलिए तो यकायक , एक दिन के लिए , चहु ओर तू बन जाती अनंत है।   बाकि दिन क्यों समझते हैं तुझे शुन्य सा ? माँ क्या तू सच में शून्य है ?